जिले के विकासखंड पाटन के ग्राम कुकरभूका के कृषक रामनरेश पटेल लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में खेती करते हैं। पारंपरिक रूप से धान और गेहूं की खेती करने वाले श्री पटेल ने बदलती कृषि परिस्थितियों और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए अपने फसल चक्र में दलहनी फसलों को शामिल किया। वर्तमान में वे उड़द, मटर एवं सोयाबीन जैसी फसलों की खेती भी कर रहे हैं।

श्री पटेल बताते हैं कि लगातार धान-गेहूं की एक जैसी फसल लेने से मिट्टी की उर्वरता में कमी के साथ कीट एवं रोगों की समस्या भी बढ़ने लगी थी। इसी को देखते हुए उन्होंने फसल विविधीकरण अपनाते हुए दलहन की खेती शुरू की। शुरुआत में उड़द की फसल ली, लेकिन उनका क्षेत्र जलभराव वाला होने के कारण अधिक पानी से फसल प्रभावित हो गई।

जलभराव की समस्या से निजात पाने के लिए श्री पटेल ने लगभग 1.25 लाख रुपये की लागत से रेज्ड बेड प्लांटर मशीन खरीदी। यह मशीन खेत में क्यारी एवं नालियां बनाते हुए फसल की बोनी करती है, जिससे अतिरिक्त पानी की निकासी आसानी से हो जाती है। मशीन से धान को छोड़कर अधिकांश फसलों की बोनी की जा सकती है।

रेज्ड बेड प्लांटर से बीज निर्धारित दूरी पर समान रूप से बोया जाता है तथा बोनी के साथ ही डीएपी जैसे उर्वरकों का उपयोग भी किया जा सकता है। इससे श्रम एवं समय की बचत होने के साथ फसल में जलभराव और कीट-व्याधि की समस्या भी कम होती है।

श्री पटेल के अनुसार, पारंपरिक खेती में जहां कई बार उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था, वहीं रेज्ड बेड प्लांटर से मशीनी बोनी अपनाने के बाद उन्हें प्रति हेक्टेयर लगभग 90 हजार से 1 लाख रुपये तक का लाभ प्राप्त हो रहा है। इस नवाचार से उन्होंने खेती को अधिक लाभकारी बनाने के साथ-साथ फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दिया है।

श्री पटेल अब आगामी समय में काली मिर्च की खेती शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही आगामी रबी सीजन में वे सरसों की खेती भी करने की योजना बना रहे हैं। उनका अनुभव क्षेत्र के अन्य कृषकों के लिए आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर जलभराव की समस्या से निपटने और खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।