कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने आज सिरोंज स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय गतिविधियों, आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं तथा सुपरवाइजरों द्वारा किए जा रहे मैदानी कार्यों की समीक्षा की। कलेक्टर श्री गुप्ता ने विभागीय कार्यों में और अधिक कसावट लाने तथा महिलाओं एवं बच्चों के लिए संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

समीक्षात्मक बैठक में कलेक्टर श्री गुप्ता ने निर्देशित किया कि सभी सुपरवाइजर अब प्रतिदिन अपने कार्यक्षेत्र में कम से कम 3-3 आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करें। निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों की उपस्थिति, पोषण व्यवस्था, बच्चों की स्वास्थ्य एवं वृद्धि संबंधी स्थिति तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का परीक्षण कर नियमित रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

कलेक्टर श्री गुप्ता ने निर्देश दिए कि आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज प्रत्येक बच्चे का वजन लिया जाना सुनिश्चित किया जाए। यदि कोई बच्चा आंगनबाड़ी केंद्र पर उपस्थित नहीं मिलता है तो संबंधित सुपरवाइजर एवं कार्यकर्ता उसके घर जाकर आवश्यक जानकारी संकलित करें तथा बच्चे की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित न रहते हुए मैदानी स्तर पर बच्चों की स्थिति का सत्यापन किया जाना आवश्यक है।

सेम एवं मेम श्रेणी के बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराने के निर्देश

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने निर्देश दिए कि कुपोषण श्रेणी में चिन्हित प्रत्येक बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जाए और आवश्यकतानुसार उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र ( NRC) में भर्ती कराया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी कुपोषित बच्चे को उपचार एवं विशेष पोषण की सुविधा से वंचित नहीं रहने दिया जाए।

उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि यदि किसी बच्चे के अभिभावक द्वारा एनआरसी में भर्ती कराने में आनाकानी की जाती है तो इसकी जानकारी संबंधित पटवारी एवं ग्राम पंचायत सचिव को दी जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर समन्वय कर बच्चे को आवश्यक उपचार एवं पोषण सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

कुपोषण की स्थिति छुपाएं नहीं, तत्काल दें जानकारी

कलेक्टर श्री गुप्ता ने सुपरवाइजरों से संवाद करते हुए स्पष्ट कहा कि किसी भी कमजोर स्थिति अथवा कुपोषण के मामले को छुपाया न जाए। विशेष रूप से यदि कोई बच्चा निर्धारित स्वास्थ्य एवं पोषण पैरामीटर के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो उसकी जानकारी तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाए, ताकि संबंधित बच्चे के लिए समय पर उपचार, विशेष पोषण एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकें।

उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति में सुधार के लिए नियमित निगरानी, समय पर पहचान और त्वरित उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए सुपरवाइजर एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने मैदानी दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें।

पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ दिलाने के निर्देश

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिलाओं एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए संचालित सभी योजनाओं एवं कार्यक्रमों का पात्र हितग्राहियों को शत-प्रतिशत लाभ दिलाया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने तथा पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर श्री गुप्ता ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल योजनाओं के क्रियान्वयन का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक देखभाल एवं विकास की महत्वपूर्ण आधारभूत इकाई हैं। इसलिए सभी संबंधित अधिकारी-कर्मचारी नियमित रूप से केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करें।