भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर में किसानों की क्षमता निर्माण एवं सोयाबीन की उत्पादन तकनीकों के प्रसार के उद्देश्य से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।मध्यप्रदेश कृषि रोडमैप कार्यक्रम के अंतर्गत देवास जिले के खातेगांव ब्लॉक के चयनित 16 किसानों के लिए “सोयाबीन की उन्नत उत्पादन, फसल संरक्षण एवं मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण तकनीक” विषय पर यह प्रशिक्षण केंद्रित रहा। कार्यक्रम को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ऑनलाइन माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सोयाबीन मध्य प्रदेश की प्रमुख खरीफ फसलों में से एक है। इसकी उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि के लिए टिकाऊ एवं उन्नत उत्पादन पद्धतियों का व्यापक प्रसार अत्यंत आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने संस्थान द्वारा विकसित नवीन सोयाबीन किस्मों का उल्लेख करते हुए बताया कि इन किस्मों में उच्च उत्पादन क्षमता के साथ प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर प्रदर्शन की क्षमता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आगामी वर्षों में इन उन्नत किस्मों के बीज किसानों तक सुलभ कराने के ठोस प्रयास किए जाएंगे।

जलवायु-अनुकूल और आधुनिक कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण

प्रशिक्षण सत्र में वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को विपरीत मौसम की परिस्थितियों (अतिवृष्टि एवं सूखा) को सहन करने वाली किस्मों, नवीन शस्य पद्धतियों, खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं व्याधि प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही सोयाबीन कटाई उपरांत मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण की संभावनाओं से भी अवगत कराया गया।

आईसीएआर के उप महानिदेशक डॉ. राजवीर सिंह ने कहा कि नवीन वैज्ञानिक अनुसंधानों को किसानों के खेतों तक पहुंचाने और उन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करने में ऐसे प्रशिक्षण मील का पत्थर साबित होते हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. के. ए. सिंह ने केंद्रीय मंत्री को संस्थान द्वारा विकसित ब्रॉड-बेड-फरो (BBF) पद्धति तथा रेज्ड-बेड प्लांटिंग जैसी जल व मौसम अनुकूल तकनीकों की उपयोगिता और परिणामों से अवगत कराया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बी. यू. दुपारे द्वारा किया गया।