तिरुवनंतपुरम स्थित द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए आयोजित मीडिया दौरे के तहत केरलम् से आए मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने आज लखनऊ में इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री विजय किरण आनंद, आईएएस से मुलाकात की। बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश में हो रहे औद्योगिक बदलाव, निवेश की संभावनाओं, बुनियादी ढांचे, पर्यटन, कौशल विकास तथा केरलम् के साथ सहयोग की संभावनाओं वाले अन्य क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इन्वेस्ट यूपी के सीईओ ने कहा कि लगभग 25 करोड़ की आबादी और बड़ी युवा कार्यबल क्षमता वाला उत्तर प्रदेश पिछले एक दशक के दौरान महत्वपूर्ण बदलावों का साक्षी बना है। वर्तमान में राज्य में आठ एक्सप्रेसवे परिचालन में हैं, जबकि आठ अन्य निर्माणाधीन हैं। प्रमुख परिवहन गलियारों के आसपास औद्योगिक क्लस्टर और भूमि बैंक भी विकसित किए गए हैं। राज्य में 14 हवाई अड्डे परिचालन के लिए तैयार हैं, जिनमें जेवर हवाई अड्डा भी शामिल है, जहां विभिन्न विकास कार्य प्रगति पर हैं। एक्सप्रेसवे, रेलवे, औद्योगिक क्षेत्रों और माल ढुलाई सुविधाओं सहित बुनियादी ढांचे के विकास पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) पिछले नौ वर्षों में लगभग 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 33 लाख करोड़ रुपये हो गया है और इसके 36 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है। पिछले पांच वर्षों के दौरान विनिर्माण क्षेत्र में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। एक दशक पहले जहां प्रतिवर्ष लगभग 500 कारखाने शुरू होते थे, वहीं पिछले वर्ष यह संख्या बढ़कर 4,300 हो गई। राज्य का निर्यात भी 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।
लगभग 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) वाले उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण, कृषि प्रसंस्करण, डेयरी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ODOP) योजना को राज्य के एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक बताया।
औद्योगिक विकास के लिए राज्य क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण अपना रहा है। एक्सप्रेसवे के निकट औद्योगिक क्लस्टरों के लिए 12,500 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है, जबकि रक्षा औद्योगिक गलियारे के तहत 5,000 एकड़ भूमि विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त बुंदेलखंड में 50,000 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। जेवर हवाई अड्डे के निकट यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण क्षेत्र एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां पहले ही लगभग 3,000 औद्योगिक इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है और उनका विकास किया जा रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन और रक्षा क्षेत्र राज्य के प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं। नोएडा एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरा है, जबकि रक्षा औद्योगिक गलियारे के छह नोड में 100 से अधिक कंपनियों को आकर्षित किया गया है।
सीईओ ने कहा कि सेवा क्षेत्र और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) भी राज्य के प्रमुख फोकस क्षेत्रों के रूप में उभर रहे हैं। नोएडा में लगभग 200 GCC और 200 आईटी कंपनियां कार्यरत हैं। आईबीएम, एचसीएल, जेनपैक्ट और टीसीएस जैसी प्रमुख कंपनियों की मौजूदगी के साथ लखनऊ भी एक महत्वपूर्ण सेवा केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।
केरलम्-उत्तर प्रदेश सहयोग के लिए पर्यटन प्रमुख क्षेत्र
केरलम् और उत्तर प्रदेश के बीच सहयोग के लिए पर्यटन को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया। उत्तर प्रदेश वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज, चित्रकूट, आगरा और लखनऊ जैसे प्रमुख स्थलों को शामिल करते हुए आध्यात्मिक, बौद्ध एवं अन्य पर्यटन सर्किट विकसित कर रहा है। सीईओ ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्थानीय उद्यमिता और विशिष्ट यात्रा अनुभवों पर आधारित केरलम् के पर्यटन मॉडल का अध्ययन कर रहा है। उन्होंने केरलम् के टूर ऑपरेटरों और आतिथ्य क्षेत्र के साथ अधिक सहयोग का स्वागत किया।
कौशल विकास पर भी विशेष जोर
कौशल विकास को भी दोनों राज्यों के बीच सहयोग के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया गया। उत्तर प्रदेश में लगभग 8,000 शैक्षणिक संस्थान हैं और प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) स्नातक तैयार होते हैं। इन्वेस्ट यूपी के ‘स्किल कनेक्ट’ और ‘करियर काउंसलिंग’ प्रभाग उद्योग एवं शिक्षा क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय तथा कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद कर रहे हैं। राज्य कुशल श्रमिकों की नियुक्ति के लिए जापान, जर्मनी और इजराइल जैसे देशों के साथ भी सहयोग कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में 36 क्षेत्र-विशिष्ट नीतियां लागू हैं। राज्य निवेशकों को 300 प्रतिशत तक टैक्स रिइम्बर्समेंट और लगभग 42 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी सहित विभिन्न निवेश प्रोत्साहन प्रदान कर रहा है। राज्य की औद्योगिक नीति के तहत लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है।
सीईओ ने बताया कि राज्य में आयोजित वैश्विक निवेश शिखर सम्मेलनों और अन्य निवेशक संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अब तक आयोजित चार ग्राउंड ब्रेकिंग समारोहों के माध्यम से 10 से 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश संबंधी परियोजनाओं की शुरुआत की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि पांचवें ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह के माध्यम से लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को शामिल किए जाने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश में हुए व्यापक बदलावों को प्रत्यक्ष रूप से समझने के लिए उन्होंने केरलम् से आए मीडिया प्रतिनिधिमंडल को राज्य का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने केरलम् के निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कारोबारी गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक सभी प्रकार का सहयोग और सहायता प्रदान की जाएगी।







