जिले में खरीफ फसलों की स्थिति का जायजा लेने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र, नरसिंहपुर के वैज्ञानिकों द्वारा सोयाबीन, अरहर, धान एवं गन्ना फसलों का सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण के दौरान सोयाबीन में अल्टरनेरिया एरियल ब्लाइट, विषाणु रोग, अरहर में फाइटोफ्थोरा तथा धान में झुलसा एवं भूरा धब्बा रोग का प्रकोप पाया गया है। किसानों को फसलों को रोग एवं कीट प्रकोप से बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सामयिक सलाह जारी की गई है।
सोयाबीन में अल्टरनेरिया एरियल ब्लाइट से बचाव
पादप संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. एसआर शर्मा ने बताया कि सोयाबीन में अल्टरनेरिया एरियल ब्लाइट का प्रकोप शुरू हो गया है। इसके नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 500 ग्राम अथवा टेबुकोनाजोल प्लस मैंकोजेब 400-600 ग्राम अथवा हेक्साकोनाजोल 400 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। 15 दिन बाद पुनः एक बार छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
सफेद मक्खी से फैलता है विषाणु रोग
सोयाबीन में विषाणु रोग भी देखा गया है। इसमें पत्तियां हरी एवं पीली होकर बेरंग हो जाती हैं, जबकि दूसरे प्रकार में पत्तियां झुलसी हुई दिखाई देती हैं और पौधे की वृद्धि रुक जाती है। विषाणु रोग का प्रसार सफेद मक्खी से होता है। सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए थायमेथोक्साम 100 ग्राम ( 25 प्रतिशत) अथवा एसिटामिप्रिड 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
अरहर में फाइटोफ्थोरा रोग पर नियंत्रण जरूरी
अरहर की फसल में फाइटोफ्थोरा रोग का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इसमें जमीन की सतह से तना काला होकर फट जाता है तथा कभी-कभी गांठों से पौधा टूट जाता है। इसके नियंत्रण के लिए मेटालेक्सिल प्लस मैंकोजेब 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
धान में झुलसा और भूरा धब्बा रोग से बचाव
धान की फसल में झुलसा एवं भूरा धब्बा रोग का प्रकोप पाया गया है। झुलसा अथवा ब्लास्ट रोग के नियंत्रण के लिए ट्राइसाइक्लाजोल 120 ग्राम अथवा कासूगामाइसिन 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। वहीं भूरा धब्बा रोग के नियंत्रण के लिए प्रोपीकोनाजोल 200 ग्राम अथवा हेक्साकोनाजोल 400 ग्राम अथवा कार्बेन्डाजिम प्लस मैंकोजेब 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
फसल में समस्या दिखाई दे तो कृषि वैज्ञानिकों से लें सलाह
कृषि विज्ञान केन्द्र ने किसानों से अपील की है कि फसल में किसी भी प्रकार के रोग या कीट का प्रकोप दिखाई देने पर स्वयं दवा का प्रयोग करने के बजाय कृषि वैज्ञानिकों से उचित सलाह लें। समस्या के निदान के लिए किसान रोगग्रस्त पौधे की स्पष्ट फोटो मोबाइल नंबर 9977244254 पर भेज सकते हैं। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा फोटो के आधार पर उचित नियंत्रण उपाय की सलाह दी जाएगी।

